Niravana Shatakam Stotram Wall Art
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Nirvana Shatakam is a popular Stotram composed by Adi Shankaracharya. Nirvana Shatakam Stotram describes the nature of the God Shiva. The minimal yet impactful artwork is imagined and modified by our own artist Vaishnavi Naik.
Mantra
मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे।
न च व्योम भूमिर्ण तेजो न वायुः चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥१॥
Transliteration:
manobuddhyahaṅkāracittāni nāhaṃ
na ca śrotrajihve na ca ghrāṇanetre।
na ca vyoma bhūmirṇa tejo na vāyuḥ cidānandarūpaḥ śivo'haṃ śivo'ham॥1॥
Hindi Translation:
न मैं मन हूँ, न बुद्धि हूँ, न अहंकार हूँ , न मैं इन्द्रियाँ हूँ - श्रवन​ (कान), चखने (जीभ), सूंघने (नाक) या देखने (आँखें), न मैं पन्च महाभूत - आकाश, पृथ्वी , अग्नि, वायु हूँ , मैं शिव हूँ, चैतन्य-आनन्द की प्रकृति का परम मंगल। मैं (शिव) शुभ हूँ।
English Translation:
I am neither the mind nor the intellect, neither the ego nor the senses - hearing (ear), tasting (tongue), smelling (nose), or seeing (eyes). I am not the five elements - space, earth, fire, air. I am Shiva, the embodiment of pure consciousness and bliss. I am the ultimate auspiciousness
न च प्राणसंज्ञो न वै पञ्चवायुः न वा सप्तधातुर्न वा पञ्चकोशः।
न वाक्पाणिपादौ न चोपस्थपायू चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥२॥

Transliteration:na ca prāṇasaṃjño na vai pañcavāyuḥ na vā saptadhātuḥ na vā pañcakośaḥ।
na vākpāṇipādau na copasthapāyū cidānandarūpaḥ śivo'haṃ śivo'ham॥2॥

Hindi Translation: न मैं प्राणवायु हूँ, न मैं पाँच प्राण हूँ, न ही मैं सात तत्व (शरीर का) हूँ, न ही पाँच कोश (शरीर का), न मैं वाणी का अंग हूँ, न ही मैं हाथ पकड़ने वाला हूँ।, गति (पैर) या उत्सर्जन, मैं सदा शुद्ध आनंदमय चेतना हूँ; मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ, सदा शुद्ध आनंदमय चेतना।

English Translation: I am not the life force, nor am I the five vital airs, Neither am I the seven elements of the body, nor the five sheaths (of the body), I am not a part of speech, nor am I the grasping hand, nor the moving feet, I am eternally pure, blissful consciousness; I am Shiva, I am Shiva, Ever pure, blissful consciousness.



न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौ मदो नैव मे नैव मात्सर्यभावः।
न धर्मो न चार्थो न कामो न मोक्षः चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥३॥

Transliteration:na me dveṣarāgau na me lobhamohau mado naiva me naiva mātsaryabhāvaḥ।
na dharmo na cārtho na kāmo na mokṣaḥ cidānandarūpaḥ śivo'haṃ śivo'ham॥3॥

Hindi Translation:न मुझमें द्वेष है, न आसक्ति है, न लोभ है और न ही मोह है, न मुझमें राग है, न ईर्ष्या और ईर्ष्या की भावना है, मैं धर्म (धार्मिकता), अर्थ (धन), काम (इच्छा) और मोक्ष की सीमा के भीतर नहीं हूँ (मुक्ति) (जीवन के चार पुरुषार्थ), मैं शिव हूँ, चेतना-आनंद की प्रकृति का परम मंगल। मैं (शिव) शुभ हूँ।

English Translation: I have no hatred, no attachment, no greed, and no delusion, There is no desire, no envy, and no feeling of envy within me, I am beyond the boundaries of duty (righteousness), wealth (material possessions), desire (pleasure), and liberation (the four aims of life), I am Shiva, the embodiment of pure consciousness and bliss, I am the ultimate auspiciousness.



न पुण्यं न पापं न सौभाग्यं न दुखं न मंत्रो न तीर्थं न वेदा न यज्ञाः।
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥४॥

Transliteration: na puṇyaṃ na pāpaṃ na saubhāgyaṃ na duḥkhaṃ na mantro na tīrthaṃ na vedā na yajñāḥ।
ahaṃ bhojanaṃ naiva bhojyaṃ na bhoktā cidānandarūpaḥ śivo'haṃ śivo'ham॥4॥

Hindi Translation: न मैं पुण्य से बंधा हूँ और न पाप से, न सांसारिक सुखों से और न ही दुखों से, न मैं भजनों से बंधा हूँ और न ही तीर्थों से, न शास्त्रों से और न ही यज्ञों से, मैं न तो भोग (अनुभव) हूँ और न ही कोई वस्तु आनंदित (अनुभवी), न ही भोक्ता (अनुभवी), मैं शिव हूँ, चेतना-आनंद की प्रकृति का परम मंगल। मैं (शिव) शुभ हूँ।

English Translation:I am not bound by virtue nor by sin, neither by worldly pleasures nor by sorrows, I am not bound by devotional practices nor by pilgrimage, neither by scriptures nor by rituals, I am neither the experiencer of enjoyment nor the one who is pleased by any object, nor am I the enjoyer, I am Shiva, the embodiment of pure consciousness and bliss, I am the ultimate auspiciousness.



न मे मृत्युशङ्का न मे जातिभेदः पिता नैव मे नैव माता न जन्मः।
न बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्यः चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥५॥

Transliteration: na me mṛtyuśaṅkā na me jātibhedaḥ pitā naiva me naiva mātā na janmaḥ।
na bandhurna mitraṃ gururnaiva śiṣyaḥ cidānandarūpaḥ śivo'haṃ śivo'ham॥5॥

Hindi Translation: न मैं मृत्यु और उसके भय से बंधा हूँ, न जाति के नियमों और उसके भेदों से, न मेरे माता-पिता हैं, न मेरा जन्म है, न मेरे सम्बन्ध हैं, न मित्र हैं, न गुरु और न शिष्य, मैं हूँ शिव, चेतना-आनंद की प्रकृति की सर्वोच्च शुभता। मैं (शिव) शुभ हूँ।

English Translation:I do not have fear of death, as I do not have death. I have no separation from my true self, no doubt about my existence, nor do I discriminate on the basis of birth. I have no father or mother, nor did I have a birth. I am not the relative, nor the friend, nor the guru, nor the disciple. I am indeed, That eternal knowing and bliss, Shiva, love and pure consciousness.



अहं निर्विकल्पो निराकाररूपो विभूत्वाच्च सर्वत्र सर्वेंद्रियाणाम ।
न चासंगतं नैव मुक्तिर्ण मेयः चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥६॥

Transliteration: aham nirvikalpo nirākārarūpo vibhūtvācca sarvatra sarveṃdriyāṇāma।
na cāsaṃgataṃ naiva muktirṇa meyaḥ cidānandarūpaḥ śivo'haṃ śivo'ham॥6॥

Hindi Translation: मैं बिना किसी भिन्नता के, बिना किसी रूप के, हर चीज के अंतर्निहित आधार के रूप में हर जगह मौजूद हूँ, और सभी इंद्रियों के पीछे, न मैं किसी चीज से जुड़ा हूँ, न किसी से मुक्त हूँ, मैं शिव हूँ, जो परम शुभ है चेतना-आनंद की प्रकृति। मैं (शिव) शुभ हूँ।

English Translation: I exist without any distinction, without any form, as the underlying essence within everything, present everywhere, And beyond all senses, I am not attached to anything, nor am I separate from anyone, I am Shiva, the supreme auspiciousness, the nature of pure consciousness and bliss. I am Shiva, I am auspicious.